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मूल्य 4 / 5
प्रेम
“सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो।”भगवान श्री सत्य साई बाबा

यह हमसे क्या माँगता है
प्रेम वह धागा है जो बाकी चारों मूल्यों में पिरोया है। यह केवल मन में रखने वाली भावना नहीं है। यह गरम परोसे गए भोजन में दिखता है, अस्पताल के वार्ड में थामे गए हाथ में, और अजनबी को परिवार की तरह अपनाने में।
किसी के माँगने से पहले ही यह देख लेना कि किसे कुछ नहीं मिला।
हफ़्ते दर हफ़्ते हाथ बँटाने आना, बदले में कुछ चाहे बिना।
हर व्यक्ति की एक जैसी सेवा करना, उसका धर्म, जाति या हालात कुछ भी हो।
जिया जाता है
नारायण सेवा (हर व्यक्ति में ईश्वर की सेवा) का अर्थ है केंद्र में बना ताज़ा भोजन, जो साल के हर हफ़्ते अपने हाथों से परोसा जाता है। इसके साथ रक्तदान शिविर, सर्दियों में कंबल वितरण और अस्पताल भेंट भी चलते हैं। जिनकी सेवा की जाती है, उनसे कभी कुछ नहीं लिया जाता।
अपने हाथों से परोसा गया ताज़ा भोजन, रक्तदान और अस्पताल भेंट, साल के हर हफ़्ते।
उपदेश
प्रेम पर
दिन की शुरुआत प्रेम से करो। दिन को प्रेम से भरो। दिन का अंत प्रेम से करो।
सेवा पर
सेवा करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठों से अधिक पवित्र हैं।
एकता पर
केवल एक ही धर्म है, प्रेम का धर्म।
यहाँ से शुरू करें
कोई ऐसी सेवा चुनिए जिसे सेवादल की ज़रूरत है और बताइए कि आप आ रहे हैं। हमारी सेवा सदा निःशुल्क है।