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शांति
“मौन शांति की पहली सीढ़ी है।”भगवान श्री सत्य साई बाबा

यह हमसे क्या माँगता है
शांति वह है जो तब बचती है जब सत्य और सदाचार स्थिर हो जाते हैं। यह आसपास के शोर का न होना नहीं है, बल्कि एक ठहराव है जिसे हम भीड़ भरी बस, कठिन बैठक या नींद-रहित रात में भी साथ ले जा सकते हैं।
हर सुबह कुछ मिनट बिना स्क्रीन के, बस बैठकर मन को ठहरने देना।
मिलकर ईश्वर का नाम गाना, ताकि कई स्वर एक ही साँस बन जाएँ।
जवाब देने से पहले ठहरना, और छोटी-छोटी खीझ को आगे बढ़ाए बिना गुज़र जाने देना।
जिया जाता है
दिल्ली एनसीआर की समितियों में भजन (भक्ति गायन) होते हैं, जिनमें कई धर्मों और भाषाओं के गीत गाए जाते हैं। एक स्वर आगे गाता है, सब उसके पीछे दोहराते हैं। कई समितियों में भजन हर हफ़्ते होते हैं, पर दिन और समय हर समिति में अलग है, इसलिए अपने केंद्र से पूछ लें। त्योहारों की सुबह नगर संकीर्तन (भोर में गलियों में गाते हुए चलना) होता है। कोई भी गा सकता है, और कोई भी बस सुन सकता है।
दिल्ली एनसीआर की समितियों में भक्ति गायन। समय हर समिति में अलग है, अपने केंद्र से पूछ लें।
उपदेश
शांति पर
शांति मन का भीतरी मौन है।
भजन पर
भजन मन को शुद्ध करने का सबसे अच्छा उपाय है।
वैदिक मंत्र
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः: भीतर शांति, आसपास शांति, सब ओर शांति।
यहाँ से शुरू करें
चाहें तो पीछे बैठिए। हर दरी पर भजन की पुस्तिकाएँ रखी हैं, और अगर आप केवल सुनें तो भी किसी को आपत्ति नहीं। अपने नज़दीकी केंद्र से भजन का दिन और समय पूछ लें।